पॉजिटिव सोच के फण्डे

पॉजिटिव सोच के फण्डे

Positive Soch Ke Funde

by एन. रघुरामन, N. Raghuraman

2014· ISBN 9789351860686

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About
उपलब्धियाँ चाहे कितनी छोटी ही क्यों न हों, बड़ों की प्रशंसा से बच्चों को गर्व का एहसास होता है। उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने की जिम्मेदारी दी जाए तो वे स्वयं को क्षमतावान और मजबूत महसूस करते हैं। इसके विपरीत, उनकी उपलब्धियों को कम करके बताना या दूसरे बच्चों के मुकाबले उन्हें कमतर बताने से उन्हें लगता है कि वे किसी लायक नहीं हैं। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि हमें बच्चों के बारे में भारी-भरकम बातें बोलने या शब्दों को हथियार की तरह इस्तेमाल करने से परहेज करना चाहिए। यह क्या हरकत है या तुम तो अपने छोटे भाई से भी ज्यादा बच्चों की तरह व्यवहार करते हो—इस तरह की बातें बच्चों के दिमाग पर उतना ही गहरा असर करती हैं, जितना पिटाई से उन्हें शरीर पर चोट का एहसास होता है। उनका मानना है कि बच्चों के बेहतर मानसिक विकास के लिए हमें उनके बारे में कुछ भी बोलते समय शब्दों का चुनाव सावधानी से करना चाहिए और दया का भाव रखना चाहिए। अपने बच्चों को यह समझाइए कि गलतियाँ सब करते हैं। उनकी कोई बात आपको पसंद न आए, फिर भी उन्हें यह एहसास दिलाइए कि आप उनसे प्यार करते हैं। याद रखिए, इम्तिहानों का मौसम है और हर घर में इसके चलते माहौल थोड़ा तनावपूर्ण होता है। ज्यादा गुस्सा परीक्षा में बच्चे के परफॉर्मेंस पर बुरा असर डाल सकता है। यह माता-पिता पर निर्भर करता है कि वे स्थिति से कैसे निबटते हैं और माहौल को किस तरह पॉजीटिव बनाते हैं, जिससे भविष्य में उन्हें निराशा न झेलनी पड़े।

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